tag:blogger.com,1999:blog-6676797246618568305.post6468213228864068060..comments2007-12-24T21:31:28.797-06:00Comments on जन विकल्प: बुद्ध, मार्क्स और आज की दुनियाPramod Ranjanhttp://www.blogger.com/profile/16171943793022610620noreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-6676797246618568305.post-77884643383760674912007-12-24T16:01:00.000-06:002007-12-24T16:01:00.000-06:00बढ़िया विवेचना। बुद्ध और मार्क्स का अच्छा सम्मेलन ...बढ़िया विवेचना। बुद्ध और मार्क्स का अच्छा सम्मेलन कराया आपने। चार्वाक चाहे वर्ण व्यवस्था पर मौन नज़र आते हों पर पाखंड का विरोध उनका ग़ज़ब का है ,इसमें संदेह नहीं।अजित वडनेरकरhttp://www.blogger.com/profile/11364804684091635102noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6676797246618568305.post-36511992935449151752007-12-24T12:49:00.000-06:002007-12-24T12:49:00.000-06:00बहुत ही बढ़िया विश्लेषण है। सोचने का एक नया नजरिया...बहुत ही बढ़िया विश्लेषण है। सोचने का एक नया नजरिया मिला। प्रेमकुमार मणि जी का और भी लिखा पढ़ने का मौका मिलेगा, ये उम्मीद है। प्रमोद जी, आपका शुक्रिया ये लेख ब्लॉग पर डालने के लिए।दिलीप मंडलhttp://www.blogger.com/profile/05235621483389626810noreply@blogger.com